दूर करके सिंदूर बिंदिया को वो, अश्कों से मुझे ही सजाती रही। दूर करके सिंदूर बिंदिया को वो, अश्कों से मुझे ही सजाती रही।
एक औरत की परिभाषा जब लिखने बैठी मैं. एक औरत की परिभाषा जब लिखने बैठी मैं.
नदी के बिछड़े किनारे पर, बिखरी हुई हो चांदनी, सितारों की छाँव तले, विहार करें हंस नदी के बिछड़े किनारे पर, बिखरी हुई हो चांदनी, सितारों की छाँव तले, विह...
"मैं" और वो "मैं" और वो
पर सब मिल जाये तो आरज़ू किसकी होगी, जिंदगी कितनी बोर होगी जिसमे पाने को कुछ बचा पर सब मिल जाये तो आरज़ू किसकी होगी, जिंदगी कितनी बोर होगी जिसमे पाने ...
असली पहचान इसी के लिए लड्ता था ना तु जीवन भर। असली पहचान इसी के लिए लड्ता था ना तु जीवन भर।